“ईसरदा का उद्घाटन हुआ तो विधायक पद छोड़ दूंगा” – दौसा से कांग्रेस MLA डीसी बैरवा का बड़ा अल्टीमेटम

दौसा। राजस्थान की राजनीति में ईसरदा पेयजल परियोजना को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। दौसा से कांग्रेस विधायक डीसी बैरवा ने भाजपा सरकार को खुली चुनौती देते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर पंचायत और नगर निकाय चुनाव से पहले भाजपा सरकार ईसरदा योजना का उद्घाटन करती है, तो वह विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे

डीसी बैरवा ने कहा कि ईसरदा पेयजल परियोजना पूरी तरह से पूर्ववर्ती गहलोत सरकार की देन है, लेकिन भाजपा सरकार अब केवल राजनीतिक फायदा उठाने के लिए इसका श्रेय लेना चाहती है।

“श्रेय लेने के लिए कर रही है जल्दबाजी”

कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि ईसरदा योजना के दौरान भाजपा ने लगातार रोड़े अटकाए। अब जब पंचायत चुनाव नजदीक हैं, तो सरकार आनन-फानन में उद्घाटन कर जनता के बीच वाहवाही लूटना चाहती है। उन्होंने कहा कि दौसा में पानी आना तय है, यह लगभग फाइनल हो चुका है, लेकिन भाजपा इसे अपनी उपलब्धि बताने की कोशिश कर रही है।

“एक साल से पहले पानी नहीं आ सकता”

डीसी बैरवा ने भजनलाल सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि चाहे भाजपा कितनी भी कोशिश कर ले, एक साल से पहले ईसरदा का पानी दौसा नहीं पहुंच सकता। उन्होंने कहा,
“पंचायत चुनाव में जनता ही भाजपा को पानी पिला देगी।”

विधायक ने दावा किया कि ईसरदा परियोजना का करीब 80 प्रतिशत काम कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही पूरा हो चुका था, जबकि मौजूदा सरकार केवल हवा बना रही है।

“दौसा की जनता को मिलेगा पानी, श्रेय कोई भी ले”

हालांकि, बैरवा ने यह भी कहा कि यह खुशी की बात है कि दौसा की जनता को जल्द पानी मिलेगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि श्रेय की राजनीति छोड़कर शेष काम को गंभीरता से पूरा किया जाए। साथ ही दोहराया कि सच्चाई यही है कि ईसरदा योजना कांग्रेस की सोच और योजना का नतीजा है।

1256 गांवों को होगा लाभ

ईसरदा पेयजल परियोजना से दौसा और सवाई माधोपुर जिले के 7 शहरों और 1256 गांवों को पेयजल मिलेगा। यह बांध सवाई माधोपुर और टोंक जिले की सीमा पर बनास नदी पर बनाया गया है। परियोजना के पूरा होने से वर्षों से चली आ रही पानी की समस्या दूर होने की उम्मीद है।


निष्कर्ष:

कांग्रेस विधायक डीसी बैरवा का यह बयान राजस्थान की राजनीति में नई हलचल पैदा कर गया है। पंचायत और नगर निकाय चुनाव से पहले ईसरदा परियोजना अब केवल पानी का मुद्दा नहीं, बल्कि श्रेय बनाम साख की लड़ाई बनती नजर आ रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा सरकार उद्घाटन को लेकर क्या रुख अपनाती है और क्या डीसी बैरवा अपने बयान पर कायम रहते हैं।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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