डीग नगर परिषद में तैनात करीब दो दर्जन से अधिक सफाई कर्मचारी अपने मूल काम को छोड़कर जिला कलेक्टर, एसपी और एसडीएम जैसे उच्च अधिकारियों के दफ्तरों और बंगलों पर ड्यूटी कर रहे हैं, जबकि उनका वेतन नगर परिषद से उठाया जा रहा है। स्वायत्त शासन विभाग के सख्त आदेशों के बावजूद इन कर्मचारियों को मूल कार्य पर नहीं लगाया गया। एक तरफ परिक्रमा मार्ग में अन्य कर्मचारी कड़ी धूप में सफाई कर रहे हैं, वहीं ये कर्मचारी एसी कमरों में तैनात हैं। इस मामले में जिला कलेक्टर मयंक मनीष ने संज्ञान लेते हुए नियमानुसार उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है।
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विस्तृत विवरण (Full Description):
डीग नगर परिषद में बड़ा खेल: अधिकारियों की 'चाकरी' में लगे दो दर्जन सफाई कर्मचारी, धूप में काम कर रहे बाकी साथियों के हक पर मार रहे डाका; कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
राजस्थान के नवगठित डीग जिले से प्रशासनिक लूपहोल और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। डीग नगर परिषद में सफाई व्यवस्था के लिए नियुक्त किए गए दो दर्जन से अधिक सफाई कर्मचारी सड़कों पर झाड़ू लगाने के बजाय बड़े साहबों के दफ्तरों और बंगलों पर व्यक्तिगत 'चाकरी' में व्यस्त हैं। हैरानी की बात यह है कि इन वीआईपी ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों का वेतन आम जनता के टैक्स के पैसे से नगर परिषद द्वारा दिया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, डीग नगर परिषद में वर्तमान में कुल 200 सफाई कर्मचारी नियुक्त हैं, जिनमें 100 स्थाई और 100 अस्थाई तौर पर कार्यरत हैं। कायदे से इन सभी को शहर की सफाई व्यवस्था देखनी चाहिए, लेकिन जमीनी स्तर पर केवल 170 से 175 कर्मचारी ही फील्ड में काम कर रहे हैं। बाकी के करीब 25 से अधिक सफाई कर्मचारी जिला कलेक्टर कार्यालय, जिला पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय और उपखंड अधिकारी (SDM) कार्यालय जैसे बड़े प्रशासनिक केंद्रों में अटैच हैं। ये कर्मचारी केवल कार्यालयों में ही नहीं, बल्कि इन अधिकारियों के सरकारी आवासों (बंगलों) पर भी घरेलू कामकाज और निजी ड्यूटी संभाल रहे हैं।
यह विरोधाभास तब और भी गंभीर हो जाता है जब एक तरफ अधिक मास के पावन अवसर पर आयोजित हो रही बृज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग में सफाई व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए बाकी सफाई कर्मचारी दिन-रात कड़ी और झुलसा देने वाली धूप में पसीना बहा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, ये रसूखदार कर्मचारी अधिकारियों के एयर कंडीशनर (AC) केबिनों और बंगलों की छांव में आराम फरमा रहे हैं।
ऐसा नहीं है कि यह मामला पहली बार सामने आया है। सफाई कर्मचारियों को उनके मूल सफाई कार्य पर ही तैनात रखने के लिए स्वायत्त शासन विभाग की ओर से पहले भी कई बार कड़े दिशा-निर्देश और आदेश जारी किए जा चुके हैं। कर्मचारी संगठन भी इस भेदभाव और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ निदेशालय स्तर तक आवाज उठा चुके हैं, लेकिन स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत और उदासीनता के कारण ये आदेश हमेशा ठंडे बस्ते में डाल दिए गए।
इस पूरे मामले के उजागर होने के बाद डीग के जिला कलेक्टर मयंक मनीष ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
"जो भी सफाई कर्मचारी अपने मूल कार्य (सफाई) को छोड़कर अन्य विभागों या कार्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उनकी सूची और पूरी जानकारी मंगवाई जा रही है। स्वायत्त शासन निदेशालय के स्पष्ट आदेशों की पालना सुनिश्चित की जाएगी और नियमानुसार उचित व कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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