DST कॉन्स्टेबल मर्डर केस में बड़ा फैसला: गोली मारने वालों को उम्रकैद, मददगारों को भी नहीं मिली राहत

राजस्थान: के दौसा में चर्चित DST कॉन्स्टेबल प्रहलाद सिंह हत्याकांड में गुरुवार को बड़ा फैसला आया। जिला एवं सत्र न्यायालय ने मामले में दो मुख्य आरोपियों को हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

कोर्ट ने सूरोठ निवासी सौरभ और सेवर निवासी नवीन को हत्या का दोषी ठहराया। वहीं, मामले के तीन अन्य आरोपी—बंटी, जीतू और शुभम—को अपराधियों को आश्रय देने और फरार होने में मदद करने का दोषी मानते हुए पांच-पांच साल की सजा सुनाई गई।

218 पेज के फैसले में कोर्ट का सख्त संदेश

इस बहुचर्चित मामले में अदालत ने 218 पन्नों का विस्तृत निर्णय सुनाया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 56 गवाह और 209 दस्तावेज पेश किए। विशेष लोक अभियोजक गोपाल शर्मा ने केस की पैरवी की। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोषियों को सजा सुनाते हुए स्पष्ट किया कि कानून के सामने कोई भी अपराधी बच नहीं सकता।

कैसे हुई थी वारदात?

यह मामला अगस्त 2023 का है, जब दौसा पुलिस को सूचना मिली थी कि दो बदमाश जयपुर से बाइक चोरी कर अवैध हथियारों के साथ हाईवे से गुजर रहे हैं। सूचना मिलते ही DST टीम के तीन कांस्टेबल—प्रहलाद सिंह, बाल केस और पन्नालाल—ने उनका पीछा शुरू किया।

बदमाशों ने पुलिस को करीब आता देख अपनी बाइक छोड़ दी और खेतों की ओर भाग गए। पुलिसकर्मी भी उनका पीछा करते हुए खेतों में पहुंच गए। इसी दौरान सिकंदरा थाना क्षेत्र के रेटा गांव के पास बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी।

मुठभेड़ के दौरान आरोपी नवीन द्वारा चलाई गई गोली कॉन्स्टेबल प्रहलाद सिंह के सिर में जा लगी। गोली लगते ही वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े। उन्हें तुरंत जयपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन करीब एक सप्ताह तक इलाज चलने के बाद उनकी मौत हो गई।

36 घंटे तक खेतों में छिपे रहे आरोपी

वारदात के बाद आरोपी नवीन और सौरभ करीब 36 घंटे तक खेतों में छिपे रहे। पुलिस से बचने के लिए उन्होंने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए थे। भूख-प्यास से परेशान होने के बाद नवीन ने अपने साथियों से संपर्क किया।

जैसे ही मोबाइल चालू हुआ, पुलिस ने लोकेशन ट्रेस कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान तीन अन्य आरोपियों ने उन्हें छिपने और भागने में मदद की, जिसके चलते उन्हें भी सजा सुनाई गई।

इलाके में फैला था आक्रोश

कॉन्स्टेबल प्रहलाद सिंह की मौत के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था। पुलिस विभाग और स्थानीय लोगों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।

प्रहलाद सिंह वर्ष 2008 में पुलिस सेवा में शामिल हुए थे और 2021 से DST टीम का हिस्सा थे। वे अपनी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे।

कानून का सख्त संदेश

इस फैसले के जरिए अदालत ने साफ संदेश दिया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले पुलिसकर्मियों पर हमला करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।


निष्कर्ष:

दौसा के इस चर्चित हत्याकांड में आया फैसला न केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में अहम कदम है, बल्कि समाज में कानून का डर भी मजबूत करता है। अदालत के इस सख्त फैसले से यह स्पष्ट है कि अपराध चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, न्याय से बचना संभव नहीं है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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