मुख्यमंत्री ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को लेकर बार-बार सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावी हार को छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर निशाना साध रही है और SIR (Special Intensive Revision) को लेकर गलत माहौल बनाया जा रहा है।
हालांकि, SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच देशभर में राजनीतिक विवाद चल रहा है। चुनाव आयोग ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि आयोग के सदस्यों के बीच आंतरिक टिप्पणियां और अलग-अलग सुझाव संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हैं, जबकि अंतिम निर्णय आयोग की ओर से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
CM भजनलाल शर्मा ने कहा कि कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों का आधार स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने से पहले तथ्यों और प्रमाणों की पुष्टि जरूरी है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, SIR समेत प्रमुख निर्णयों को लेकर चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट को आधार बनाकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
चुनाव आयोग ने 23 सितंबर को जारी अपने स्पष्टीकरण में कहा था कि लिखित टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच प्रक्रिया आयोग के नियमित कामकाज का हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक पिछले एक वर्ष में लिए गए उसके निर्णय अंतिम रूप से सर्वसम्मति से लिए गए।
मुख्यमंत्री ने SIR को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग ने 24 जून 2025 को बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश जारी किया था।
सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले में बिहार में SIR शुरू करने की निर्वाचन आयोग की शक्ति और प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न सवालों पर सुनवाई हुई थी। कोर्ट के निर्णय में कहा गया कि आयोग द्वारा बताए गए मृत मतदाताओं, स्थानांतरण और अपात्र व्यक्तियों के नाम जैसी समस्याएं मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े वैधानिक प्रावधानों के दायरे में आती हैं।
भजनलाल शर्मा ने इसी न्यायिक प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कांग्रेस से सवाल किया कि न्यायिक प्रक्रिया के बाद भी संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार राजनीतिक आरोप लगाना कितना उचित है।
SIR को लेकर विवाद तब तेज हुआ जब इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि निर्वाचन आयोग के दो आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े कुछ फैसलों और प्रशासनिक निर्देशों पर कई बार आपत्तियां दर्ज की थीं।
रिपोर्ट के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की गई थीं। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि आंतरिक टिप्पणियां और अलग-अलग विचार सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इन्हें अंतिम निर्णय से अलग देखा जाना चाहिए। आयोग ने कहा कि SIR सहित उसके निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष को संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय जनता के बीच जाकर काम करना चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस के दावों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी लगातार झूठ और सनसनी फैलाने का काम कर रही है। भजनलाल शर्मा ने यह भी कहा कि कांग्रेस को चुनावी हार और दूसरी पार्टी की जीत को स्वीकार करना चाहिए।
ये मुख्यमंत्री के राजनीतिक आरोप हैं; कांग्रेस की ओर से SIR और चुनाव आयोग को लेकर अलग-अलग आपत्तियां और सवाल सार्वजनिक रूप से उठाए गए हैं। हालिया विवाद में कांग्रेस ने चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण पर भी सवाल उठाए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे विवाद की शुरुआत एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट को आधार बनाकर हुई। उनके अनुसार, रिपोर्ट में सामने रखे गए तथ्यों के आधार पर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए गए, जबकि आयोग ने उस रिपोर्ट में किए गए निष्कर्षों को स्वीकार नहीं किया।
चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा कि केवल कुछ आंतरिक टिप्पणियों को सामने रखने से पूरी निर्णय प्रक्रिया की तस्वीर सामने नहीं आती। आयोग ने दावा किया कि उसके आदेश और प्रशासनिक निर्देश कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए गए हैं।
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